झारखंड
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मुआवजा, रोजगार और जमीन अधिग्रहण को लेकर विधायक रोशन लाल चौधरी ने उठाए बड़े सवाल
बड़कागांव में फिर गरमाया जमीन और विस्थापन का मुद्दा
एनटीपीसी कोयला खनन क्षेत्र में प्रभावित रैयतों की समस्याओं को लेकर बड़कागांव विधायक Roshan Lal Choudhary ने पूर्व विधायक लोकनाथ महतो के साथ हजारीबाग उपायुक्त से मुलाकात कर कई महत्वपूर्ण मुद्दों को मजबूती से उठाया। किसान संघर्ष समिति के आग्रह पर हुई इस मुलाकात में जमीन अधिग्रहण, मुआवजा भुगतान और विस्थापित परिवारों को रोजगार देने जैसे गंभीर विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त को बताया कि एनटीपीसी की पंकरी बरवाडीह कोल परियोजना क्षेत्र में प्रभावित ग्रामीणों और रैयतों को आज भी कई मूलभूत समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। मुख्य रूप से गैर-मजरुआ भूमि का उचित मुआवजा नहीं मिलना और रैयती जमीन का भुगतान पुराने प्रावधानों के तहत किया जाना लोगों में भारी नाराजगी का कारण बना हुआ है।
किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष और पूर्व विधायक लोकनाथ महतो ने उपायुक्त को जानकारी देते हुए कहा कि वर्ष 2015 में कंपनी द्वारा यह सहमति दी गई थी कि गैर-मजरुआ जमीन का मुआवजा भी रैयती भूमि के समान दिया जाएगा, लेकिन अब कंपनी अपने ही समझौते से पीछे हटती नजर आ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी बिना उचित मुआवजा दिए जबरन जमीन कब्जाने की कोशिश कर रही है, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
उन्होंने यह भी मांग की कि जिस प्रकार एनटीपीसी की केरेडारी कोल परियोजना में 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के अनुसार रैयती जमीन का मुआवजा दिया जा रहा है, उसी तरह पंकरी बरवाडीह परियोजना में भी उसी कानून के तहत भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
पूर्व विधायक लोकनाथ महतो ने साफ शब्दों में कहा कि रैयत अपनी जमीन और अधिकारों से पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यदि कंपनी जबरदस्ती जमीन लेने की कोशिश करेगी तो ग्रामीण इसका कड़ा विरोध करेंगे। उन्होंने कहा कि बिना उचित मुआवजा और अधिकार दिए ग्रामीण अपनी जमीन किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे।
वहीं विधायक रोशन लाल चौधरी ने भी प्रभावित परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराने और विस्थापितों के पुनर्वास की मांग को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं के नाम पर स्थानीय लोगों के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती और प्रशासन को इस दिशा में गंभीर पहल करनी चाहिए।
मामले को गंभीरता से सुनने के बाद उपायुक्त ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि रैयतों के साथ किसी प्रकार का शोषण नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार और कानून के प्रावधानों के अनुसार ही मुआवजा भुगतान सुनिश्चित कराया जाएगा। उपायुक्त ने यह भी कहा कि अगले महीने की 4 तारीख के बाद इस पूरे मामले की विशेष समीक्षा की जाएगी और प्रभावित लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
इस मुलाकात के बाद क्षेत्र के रैयतों और विस्थापित परिवारों में उम्मीद जगी है कि वर्षों से लंबित उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में अब ठोस पहल हो सकती है।