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सेप्टिक टैंक बना मौत का कुआं!

Ravindr kumar rana 27 May 2026, 09:31 AM 240 views
सेप्टिक टैंक बना मौत का कुआं!
हजारीबाग के कूद गांव में एक ही परिवार के 3 लोगों की दर्दनाक मौत, पूरे इलाके में मातम
मां, बेटे और चाचा की जहरीली गैस से गई जान… परिवार का मुखिया जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा हजारीबाग जिले के सदर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत कटकमदाग थाना क्षेत्र के ग्राम कूद से मंगलवार को एक ऐसी दर्दनाक घटना सामने आई, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत ने गांव में मातम पसार दिया है। हर आंख नम है और हर जुबान पर सिर्फ एक ही सवाल — आखिर इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हो गई? प्राप्त जानकारी के अनुसार, घर के सेप्टिक टैंक में बनी जहरीली गैस इस दर्दनाक हादसे की वजह बनी। बताया जा रहा है कि टैंक की सफाई या किसी अन्य कार्य के दौरान परिवार के सदस्य उसके संपर्क में आए और एक-एक कर जहरीली गैस की चपेट में आते चले गए। इस हृदयविदारक हादसे में मां चमेली देवी, पुत्र रवि साव और चाचा मदन साव की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। घटना इतनी भयावह थी कि जिसने भी सुना, उसकी रूह कांप उठी। वहीं परिवार के मुखिया आनंद साव गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें आनन-फानन में इलाज के लिए Sheikh Bhikhari Medical College and Hospital में भर्ती कराया गया है। जहां उनका इलाज जारी है। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंची। पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। गांव में चीख-पुकार और मातम का ऐसा दृश्य था जिसे देखकर हर किसी की आंखें भर आईं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ ही पलों में पूरा परिवार उजड़ गया। मंगलवार की सुबह जिस घर में हंसी-खुशी का माहौल था, शाम होते-होते वहां सिर्फ चीखें और सन्नाटा बचा। यह हादसा एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि सेप्टिक टैंक और बंद स्थानों की सफाई के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी कितनी खतरनाक साबित हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे स्थानों में जहरीली गैसें तेजी से बनती हैं, जो कुछ ही सेकंड में इंसान की जान ले सकती हैं। बिना सुरक्षा उपकरण और तकनीकी सहायता के ऐसे कार्य करना मौत को दावत देने जैसा है। इस घटना ने पूरे हजारीबाग जिले को स्तब्ध कर दिया है। अब लोग प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में सेप्टिक टैंक की सफाई को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को इस तरह का दर्द न सहना पड़े।