झारखंड
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रोमी चौक की जलमीनार बनी भ्रष्ट व्यवस्था का स्मारक, लाखों खर्च फिर भी बूंद-बूंद पानी को तरसे ग्रामीण
“हर घर जल” योजना के दावों की खुली पोल — पाइपलाइन बिछी, टंकी बनी, लेकिन आज तक घरों तक नहीं पहुंचा पानी
सरकार की महत्वाकांक्षी “हर घर जल” योजना के तहत रोमी पंचायत के रोमी चौक में लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई जलमीनार आज लोगों के लिए सुविधा नहीं, बल्कि सरकारी लापरवाही और अधूरे विकास कार्यों की प्रतीक बनकर खड़ी है। जिस योजना से गांव के हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का सपना दिखाया गया था, वह सपना आज भी अधूरा पड़ा है।
ग्रामीणों को भरोसा दिलाया गया था कि जलमीनार शुरू होने के बाद उन्हें पानी की समस्या से हमेशा के लिए राहत मिल जाएगी। घर-घर नल से पानी पहुंचेगा और लोगों को चापाकल व कुओं पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। जलमीनार बने कई वर्ष बीत चुके हैं, बावजूद इसके आज तक इसे नियमित रूप से चालू नहीं किया गया।
स्थिति यह है कि लाखों रुपये की लागत से तैयार यह विशाल जलमीनार केवल शोपीस बनकर खड़ी है। गांव में जगह-जगह पाइपलाइन तो बिछा दी गई, लेकिन कई घरों तक नल कनेक्शन तक नहीं लगाए गए। जहां पाइपलाइन पहुंची भी है, वहां आज तक पानी की एक बूंद नहीं पहुंच सकी।
ग्रामीणों का आरोप है कि योजना के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई और निर्माण कार्य अधूरा छोड़ दिया गया। लोगों का कहना है कि सरकारी फाइलों में योजना पूरी दिखा दी गई, लेकिन जमीन पर इसका कोई लाभ ग्रामीणों को नहीं मिला। इससे लोगों में भारी नाराजगी और आक्रोश है।
पेयजल संकट का सबसे ज्यादा असर महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों पर पड़ रहा है। आज भी लोग चापाकल, कुओं और दूसरे वैकल्पिक जल स्रोतों के सहारे अपनी जरूरतें पूरी करने को मजबूर हैं। गर्मी बढ़ने के साथ समस्या और गंभीर हो जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि जलमीनार बनने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि अब उनके घरों में नियमित पानी मिलेगा, लेकिन वर्षों बाद भी उनका इंतजार खत्म नहीं हुआ।
ग्रामीणों ने कई बार संबंधित विभाग, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामने इस समस्या को उठाया, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इससे विभागीय कार्यप्रणाली और योजनाओं की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, निर्माण कार्य में हुई अनियमितताओं की जिम्मेदारी तय हो और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही जलमीनार को जल्द से जल्द चालू कर हर घर तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
रोमी चौक की यह जलमीनार अब विकास के दावों और जमीनी सच्चाई के बीच की खाई को उजागर करती नजर आ रही है। करोड़ों की योजनाएं अगर लोगों तक राहत नहीं पहुंचा पा रही हैं, तो ऐसे विकास कार्यों पर सवाल उठना लाजिमी है।